SamajwadiParty को कुछ सीटों पर ओवैसी की पार्टी से खतरा महसूस हो रहा है. लेकिन याद रहे कि 2012 के चुनाव में पीस पार्टी की मौजूदगी के बावजूद SP को मुस्लिम वोटरों का भरपूर साथ मिला था. | mdyusufansari UttarPradeshElections
) के पहले चरण के मतदान के लिए पर्चे भरे जाने की प्रक्रिया शुरु हो गई है. राजनीतिक दलों के उम्मीदवीरों की पहली लिस्ट आ गई है. कुछ सीटों पर ये साफ हो गया है कि मुकाबला किनके बीच है. ज्यादातर सीटों पर उम्मीदवारों के नाम आने अभी बाकी हैं. इस चुनाव में जहां बीजेपी के सामने अपनी सत्ता को बचाने की बड़ी चुनौती है, वहीं विपक्षी दलों के लिए उसे सत्ता से उखाड़ने की बड़ी चुनौती है.2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बहुल जिलों की विधानसभा सीटें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.
आमतौर पर यह माना जाता है कि मुसलमान बीजेपी को हराने के लिए किसी एक पार्टी को एक मुश्त वोट देते हैं. इसलिए 20% या इससे ज्यादा आबादी वाले जिलों को मुस्लिम बहुल मान लिया जाता है. उत्तर प्रदेश में राजनीति पूरी तरह जाति समीकरणों पर आधारित है. कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां मुसलमानों की आबादी 19% से ज्यादा और 20% से कम है. सीतापुर में मुस्लिम आबादी 19.93%, अलीगढ़ में 19.85%, गोंडा में 19.76% और मऊ में 19.43% है. इन 29 जिलों में विधानसभा की कुल 163 सीटें हैं. इनमें से 31 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. जो पार्टी इनमें से ज्यादा सीटें जीतेगी सत्ता पर उसी का कब्जा होगा. पिछले दो विधानसभा चुनाव के नतीजे तो कम से कम यही बताते हैं.2017 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल इन 29 जिलों की 163 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 137 सीटें जीती थी.
इस बार वो खुद करीब 50,000 बूथों पर कुछ मुस्लिम वोट हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है. उसकी कोशिश है कि मुस्लिम वोट SP, बीएसपी, कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी के साथ-साथ बीजेपी को भी मिलें तो उसकी जीत का रास्ता आसान हो जाएगा.