RussianUkrainianWar ने पूरी दुनिया पर असर डाला है, शेयर बाजार अस्थिर होकर गिर रहा है तो कच्चे तेल का दाम बढ़ रहा है, जानिए इस युद्ध का खामियाजा कैसे चुका रही है दुनिया. | mukulschauhan
रूस-यूक्रेन के बीच जंग थमने का नाम नहीं ले रही है. इस युद्ध ने मौत और तबाही का मंजर देख लिया है, रूस और यूक्रेन की ओर से हजारों सैनिकों को मार गिराने के दावे हैं तो दूसरी ओर एक दूसरे की संपत्ति और हथियारों को नष्ट करने की बातें भी लगातार की जा रही हैं. वहीं इस युद्ध का असर केवल इन दोनों देशों तक सीमित नहीं है,अभी तक यूक्रेन को कितना नुकसान ?
रूस-यूक्रेन युद्ध में अभी तक दोनों देशों को भारी नुकसान हुआ है, रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि रूस के सशस्त्र बलों ने यूक्रेन के 1600 से अधिक सैन्य ठिकाने तबाह कर दिए हैं, रूस के मिलिट्री हेलीकॉप्टर स्पेशल ऑपरेशन में लगे हैं और इसके आलावा दावा है कि यूक्रेनी सेना के 62 कमांड पोस्ट और संचार केंद्र, 39 एस-300, बुक एम-1 और ओसा वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली तथा 52 रडार स्टेशन रूस ने ध्वस्त कर दिए हैं.रूसी सेना ने यूक्रेन के जैपोरिजिया न्यूक्लियर प्लांट को अपने कब्जे में ले लिया है.
के हालात बनते हैं. यूक्रेन में भी तेज़ी से पलायन हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि रूसी हमले के बाद से करीब 10 लाख लोग यूक्रेन छोड़कर चले गए हैं। यूक्रेन में रूस के हमलों में अब तक 227 नागरिकों की मौत हो चुकी है जबकि 525 अन्य लोग घायल हैं।के जरिए 2 मार्च तक के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक रूस के करीब 5840 लोग मारे गए हैं. वहीं 30 एयरक्राफ्ट्स को भी रूस को गंवाना पड़ा है. यूक्रेन ने रूस को आक्रमणकारी बताते हुए कहा है कि जंग में रूस को 31 हैलीकॉप्टर का नुकसान हुआ है.
पश्चिमी देशों और यूरोप ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं. रूस को SWIFT पेमेंट सिस्टम से बाहर कर दिया गया है. अमेरिका रूस के रईसों की संपत्ति के पीछे पड़ गया है. खुद पुतिन की साख को गहरा धक्का पहुंचा है. एक तो उनपर युद्ध थोपने का आरोप है दूसरा युद्ध लंबा खींचने से रूस की इज्जत घटी है.रूस-यूक्रेन में लड़ाई के चलते खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. भारत की बात करें तो बाजारों में खाद्य तेलों के दामों में भारी उछाल देखा जा रहा है.
15 दिन पहले रिफाइंड जहां 140 रुपए लीटर था वो अब बढ़कर 165 रुपए लीटर हो गया है. यहां ये जानना जरुरी है कि रूस और यूक्रेन सूरजमुखी तेल के सबसे बड़े उत्पादक हैं. युद्ध के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है.खाने पीने के सामानों के दाम बढ़ने के पीछे जानकार क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं. दुनिया भर में क्रूड ऑयल के दामों में लगभग 30 फीसदी का उछाल देखने को मिल रहा है.
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