फॉरेंसिक टेस्ट में हुई पेगासस द्वारा जासूसी की पुष्टि, निशाने पर थे कई भारतीय पत्रकार

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फॉरेंसिक टेस्ट में हुई पेगासस द्वारा जासूसी की पुष्टि, निशाने पर थे कई भारतीय पत्रकार PegasusProject Snooping PegasusSpyware India Journalists पेगाससप्रोजेक्ट जासूसी पेगाससस्पायवेयर भारत पत्रकार

द वायर और सहयोगी मीडिया संस्थानों द्वारा दुनिया भर में हजारों फोन नंबरों- जिन्हें इजरायली कंपनी के विभिन्न सरकारी ग्राहकों द्वारा जासूसी के लिए चुना गया था, के रिकॉर्ड्स की समीक्षा के अनुसार, 2017 और 2019 के बीच एक अज्ञात भारतीय एजेंसी ने निगरानी रखने के लिए 40 से अधिक भारतीय पत्रकारों को चुना था.

एनएसओ इस दावे का खंडन करता है कि लीक की गई सूची किसी भी तरह से इसके स्पायवेयर के कामकाज से जुड़ी हुई है. द वायर और पेगासस प्रोजेक्ट के साझेदारों को भेजे गए पत्र में कंपनी ने शुरुआत में कहा कि उसके पास इस बात पर ‘यकीन करने की पर्याप्त वजह है’ कि लीक हुआ डेटा ‘पेगासस का उपयोग करने वाली सरकारों द्वारा निशाना बनाए गए नंबरों की सूची नहीं’ है, बल्कि ‘एक बड़ी लिस्ट का हिस्सा हो सकता है, जिसे एनएसओ के ग्राहकों द्वारा किसी अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया.

नरेंद्र मोदी सरकार ने अब तक स्पष्ट रूप से पेगासस के आधिकारिक तौर पर इस्तेमाल से इनकार नहीं किया है, पर यह उन आरोपों को खारिज करती रही है कि भारत में कुछ लोगों की अवैध निगरानी के लिए पेगासस का इस्तेमाल किया जा सकता है. शनिवार को पेगासस प्रोजेक्ट के सदस्यों द्वारा इस बारे में भेजे गए सवालों के जवाब में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसी बात को दोहराया है.

एआई की सिक्योरिटी लैब द्वारा किए गए विशिष्ट डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण में लीक हुई सूची में शामिल छह भारतीय पत्रकारों के मोबाइल फोन पर पेगासस स्पायवेयर के निशान मिले, जो इस लिस्ट में अपना नंबर मिलने के बाद अपने फोन की जांच करवाने के लिए सहमत हुए थे. के लिए नियमित तौर पर राजनीतिक और सुरक्षा मामलों पर लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रेमशंकर झा का नंबर भी रिकॉर्ड्स में मिला है. इसी तरह स्वतंत्र पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी को भी तब निशाना बनाया गया था, जब वे वायर के लिए लिख रही थीं.सर्विलांस के लिए निशाना बनाए जाने की बात बताए जाने पर झा ने कहा, ‘जिस तरह यह सरकार भारतीय संविधान का अपमान इसकी रक्षा करने वालों को ही फंसाने के लिए कर रही है, मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि यह खतरा है या तारीफ.

कई ऐसे वरिष्ठ पत्रकार, जिन्होंने मुख्यधारा के संगठनों को छोड़ दिया है, वे भी लीक हुए डेटा में संभावित लक्ष्य के रूप में दिखाई देते हैं. एक युवा टीवी पत्रकार, जिन्होंने उनका नाम न देने को कहा है, क्योंकि वे किसी और क्षेत्र में करिअर बनाने के लिए पत्रकारिता छोड़ चुकी हैं, ने वायर को बताया कि जहां तक उन्हें याद पड़ता है डेटा में दिखाई गई समयावधि में जिस स्टोरी के लिए उन्हें संभवतया निगरानी के लिए निशाना बनाया जा सकता है, वह सीबीएसई पेपर लीक से जुड़ी थी.2019 में वॉट्सऐप ने कनाडा के सिटिज़न लैब के साथ मिलकर इस ऐप की सुरक्षा में सेंध लगाने को लेकर हुए पेगासस हमले को लेकर इससे प्रभावित हुए दर्जनों भारतीयों को चेताया था.

हेरन ने पेगासस प्रोजेक्ट को बताया कि उनके अख़बार की आलोचनात्मक रिपोर्ट के कारण वर्षों से सभी सरकारों के साथ उनका टकराव हुआ है और उन्हें कई कानूनी नोटिस मिले हैं.उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर किसी भी तरह से निगरानी रखा जाना ‘शर्मनाक’ है. उन्होंने कहा, ‘उन्हें यह पसंद नहीं है कि उनके नेतृत्व में देश जिस दिशा में जा रहा है, हम उसकी आलोचना करें. वे हमें चुप कराने की कोशिश करते हैं.’

पेगासस प्रोजेक्ट के डेटा के मुताबिक रूपेश के फोन की निगरानी की शुरुआत इस रिपोर्ट के कुछ महीनों बाद हुई थी.

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