अफगानिस्तान: अमेरिकी सेना की वापसी, अब क्या करे भारत Afghanistan India Taliban
किए गए राजनीतिक और सैन्य शून्य को भर दिया है। उत्तरी अफगानिस्तान के बड़े इलाकों के साथ-साथ, जहां जातीय अल्पसंख्यक उज्बेक, हजारा और ताजिक रहते हैं, ताजिकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा तक अपना नियंत्रण स्थापित कर उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि नॉर्दर्न एलायंस-जिसे भारत ने 2001 में समर्थन दिया था, जिसने अमेरिका के लिए जमीनी स्तर पर काफी लड़ाई लड़ी थी और जो काबुल से तालिबान को उखाड़ फेंकने के लिए पर्याप्त था-फिर से आकार न ले...
तालिबान ने अमेरिका की मदद करने के खिलाफ सबको चेताया है। हैरानी की बात नहीं कि 9/11 के बाद के वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी जंग का पूर्व बहादुर सेनानी पाकिस्तान अमेरिकियों को हवाई क्षेत्र और समर्थन देने से इन्कार करने वाला पहला देश बन गया है। चीन के समर्थन पर इमरान खान सुरक्षित खेल खेल रहे हैं। दो दशकों तक तालिबान को सफलतापूर्वक पनाह और समर्थन देने, अफगानिस्तान में उनके मौजूदा सैन्य अभियान को सुविधाजनक बनाने तथा चीन का समर्थन सुनिश्चित करने का यह पाकिस्तानी रुख भारत के लिए उतना ही चिंताजनक...
भारत के लिए अफगानिस्तान में इतिहास खुद को दोहराने के लिए तैयार है। भारत के लिए अफगानिस्तान में आशंकाएं उस समय से भी बदतर प्रतीत होती हैं, जब 1992 में वहां इसकी समर्थक सरकार गिर गई थी। तब तक सोवियत संघ, जिसके साथ भारत का गठबंधन था, विघटित हो गया था। भारत एक बार फिर वहां अलग-थलग है, क्योंकि उस क्षेत्र में इसके करीबी माने जाने वाले अमेरिका ने काबुल छोड़ दिया है। यही नहीं, अमेरिका ने अशरफ गनी सरकार को तालिबान के गंभीर खतरे के बीच छोड़ दिया है, और तालिबान का भारत से कभी बेहतर रिश्ता नहीं रहा।अगर...
Malaysia Latest News, Malaysia Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
कांधार कांसुलेट से भारतीयों की वापसी, अफगानिस्तान में पाकिस्तान का खेलभारत ने कांधार से अपने तमाम राजनयिकों और कर्मचारियों को वापस बुला लिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने जो बयान जारी किया है उसमें कहा गया है कि भारत ने अपना कांसुलेट बंद नहीं किया है. कांधार शहर के आसपास जिस तरह से भारी लड़ाई चल रही है उसके मद्देनज़र भारतीयों की वापसी कराई गई है. भारतीय कर्मियों की की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है. ये भी कहा गया है कि कांसुलेट का कामकाज़ स्थानीय, यानी अफगानी कर्मचारियों के माध्यम से किया जा रहा. साथ ही वीजा और दूसरी कांसुलेट सेवा को काबुल दूतावास के जरिए जारी रखा जाएगा.
Read more »
अफ़ग़ानिस्तान में भारत को क्या काबुल दूतावास भी बंद करना पड़ेगा? - BBC News हिंदीअप्रैल 2020 में भारत ने हेरात और जलालाबाद के वाणिज्यिक दूतावासों से सभी कर्मियों को बुला लिया था. अब कंधार के वाणिज्यिक दूतावास से बुलाया गया है. क्या यह सिलसिला काबुल दूतावास तक जाकर थमेगा?
Read more »
यूएफओ : क्या कहती है अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की रिपोर्टअमेरिकी रक्षा मंत्रालय की टास्क फोर्स की रिपोर्ट है कि 17 साल में धरती पर दिखे 144 यूएफओ, भारत में भी 1951 से दिख रहीं उड़न तश्तरियां।
Read more »
तालिबान का खतरा: भारत ने कंधार में कॉन्सुलेट बंद किया, स्टाफ वापस बुलायातालिबान का खतरा: भारत ने कंधार में कॉन्सुलेट बंद किया, स्टाफ वापस बुलाया Taliban Afghanisatan India Kandhar IndianConsulateClosed
Read more »
द इकोनॉमिस्ट: पढ़िए, द इकोनॉमिस्ट की चुनिंदा स्टोरीज सिर्फ एक क्लिक पर1. अफगानिस्तान में अमेरिका बीस साल से लड़ रहा है। उसने फौजी अभियान पर 149 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं। उसके हजारों सैनिक मारे गए। हजारों अफगानियों को जान गंवानी पड़ी है। इतने लंबे अभियान के बाद के बाद भी अमेरिका के पास दिखाने के लिए कुछ नहीं है। अमेरिकी सैनिकों की वापसी से अफगानिस्तान में क्या हालात बदलेंगे, दुनिया पर क्या असर होगा, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख... | Read selected stories of The Economist with just one click 11 July 2021
Read more »
पवित्र रिश्ता 2: दर्शकों के बीच नई स्टार कास्ट के साथ लौट रहा है शो, जानिए कहां हैं पहले सीजन के स्टार्सपवित्र रिश्ता 2: दर्शकों के बीच नई स्टार कास्ट के साथ लौट रहा है शो, जानिए कहां हैं पहले सीजन के स्टार्स PavitraRishta SushantSinghRajput AnkitaLokhande
Read more »